DGCA का बड़ा फैसला! एयर इंडिया को मिली FDTL नियमों में बड़ी राहत, वेस्ट एशिया के तनाव ने बढ़ाई पायलटों की मुश्किल

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच एयर इंडिया को बड़ी राहत मिली है. डीजीसीए ने पायलटों की ड्यूटी के समय में अस्थायी बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है. जानिए इसका सुरक्षा पर क्या होगा असर.
DGCA का बड़ा फैसला! एयर इंडिया को मिली FDTL नियमों में बड़ी राहत, वेस्ट एशिया के तनाव ने बढ़ाई पायलटों की मुश्किल

दुनिया के एक हिस्से में जब जंग छिड़ती है, तो उसकी तपिश मीलों दूर तक महसूस की जाती है. इस बार मिडिल ईस्ट के संघर्ष ने आसमान के रास्तों को उलझा दिया है. एयर इंडिया, जो दुनिया भर में अपनी उड़ानें भरती है, उसे एक बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है.

वेस्ट एशिया के ऊपर से गुजरने वाले कई एयरस्पेस बंद हैं, जिसकी वजह से जहाजों को घूमकर जाना पड़ रहा है और उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है. इस इमरजेंसी को देखते हुए विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) ने एयर इंडिया के लिए एक खास मंजूरी दी है. यह मंजूरी पायलटों की ड्यूटी के घंटों से जुड़ी है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे यात्रियों और क्रू पर क्या असर पड़ेगा.

क्या है एफडीटीएल (FDTL) और क्यों मिली छूट?

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विमानन की दुनिया में 'FDTL' यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम है. यह तय करता है कि एक पायलट एक बार में कितनी देर तक जहाज उड़ा सकता है और उसे कितनी देर आराम मिलना चाहिए.

सामान्य नियमों के मुताबिक, थकान से बचने के लिए एक पायलट का फ्लाइंग टाइम 10 घंटे और ड्यूटी पीरियड 12 घंटे तक सीमित होता है. लेकिन मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से रूट्स इतने लंबे हो गए हैं कि पुराने समय में उड़ान पूरी करना नामुमकिन हो रहा था. इसी को देखते हुए एयर इंडिया ने डीजीसीए से गुहार लगाई थी, जिसे अब अस्थायी तौर पर मंजूरी मिल गई है.

ड्यूटी के घंटों में हुआ इतना विस्तार

डीजीसीए ने एयर इंडिया के अनुरोध पर जो छूट दी है, वह मुख्य रूप से दो-पायलट ऑपरेशंस वाले चुनिंदा रूट्स के लिए है. आमतौर पर जिन लंबे रूट्स के लिए तीन पायलटों की जरूरत पड़ती थी, वहां अब दो पायलटों के साथ काम चलाने की कोशिश होगी.

फ्लाइंग टाइम (FT) में बढ़ोतरी: पायलटों का अधिकतम फ्लाइंग टाइम 10 घंटे से बढ़ाकर अब 11 घंटे 30 मिनट कर दिया गया है. यानी अब वे डेढ़ घंटा ज्यादा समय तक हवा में रहेंगे.

फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) में विस्तार: पायलटों की कुल ड्यूटी का समय, जिसमें उड़ान से पहले और बाद के काम भी शामिल होते हैं, उसे 13 घंटे से बढ़ाकर 14 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है.

थकान कम करने के लिए 'एक्स्ट्रा रेस्ट' का वादा

लंबी ड्यूटी का मतलब है ज्यादा थकान, और विमानन क्षेत्र में थकान सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानी जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए डीजीसीए ने एक शर्त भी रखी है. जिन उड़ानों पर पायलटों को इस विस्तारित ड्यूटी के लिए तैनात किया जाएगा, उन क्रू मेंबर्स को 4 घंटे का अतिरिक्त रेस्ट पीरियड दिया जाएगा. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि लंबी उड़ान के बाद पायलट अच्छी तरह रिकवर कर सकें और अगली ड्यूटी के लिए तैयार हो सकें.

सुरक्षा को लेकर उठते गंभीर सवाल

जहां एक तरफ ऑपरेशंस को जारी रखने के लिए यह कदम जरूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा के जानकार इस पर चिंता भी जता रहे हैं. डीजीसीए को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया गया है कि ड्यूटी का समय बढ़ाना यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो सकता है. जानकारों का कहना है कि नियमों के अनुसार एफडीटीएल में इतनी बड़ी छूट पायलटों की शारीरिक और मानसिक क्षमता पर असर डाल सकती है. खास तौर पर तब, जब लैंडिंग और सेक्टर को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई हो. विमान सुरक्षा (Flight Safety) के लिहाज से यह एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है.

मिडिल ईस्ट का संकट और एयर इंडिया की चुनौती

वेस्ट एशिया में एयरस्पेस बंद होने से 'ब्लॉक टाइम' यानी इंजन शुरू होने से लेकर बंद होने तक का समय बढ़ गया है. जो उड़ान पहले सीधे रास्ते से जल्दी पहुंचती थी, उसे अब कई देशों को बचाकर लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. एयर इंडिया के सामने चुनौती यह है कि अगर वह इन नियमों में छूट नहीं लेती, तो उसे कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती थीं. ऑपरेशंस को सुचारू रखने और यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था एक मजबूरी की तरह सामने आई है.

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