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Air India Plane Crash: अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 के दर्दनाक हादसे की जांच में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. वॉल स्ट्रीट जर्नल और रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती जांच से जुड़े अमेरिकी अधिकारियों ने कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग के आधार पर यह संकेत दिया है कि क्रैश से कुछ सेकंड पहले विमान के कप्तान ने जानबूझकर इंजन के फ्यूल सप्लाई को बंद कर दिया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्घटना के समय 787 ड्रीमलाइनर विमान के पहले अधिकारी (First Officer) विमान उड़ा रहे थे और उन्होंने जब देखा कि अनुभवी कप्तान ने ईंधन की सप्लाई कंट्रोल करने वाले स्विच को "कटऑफ" स्थिति में डाल दिया है, तो वो हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत कप्तान से इसका कारण पूछा. इसके बाद कॉकपिट में हल्का तनाव और घबराहट का माहौल बन गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहले अधिकारी के चेहरे पर चिंता दिखी जबकि कप्तान शांत दिखाई दिए.
इस रिपोर्ट पर अब तक भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), एयर इंडिया या बोइंग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट में शामिल सूत्रों के मुताबिक, दोनों पायलटों—कप्तान सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर—के पास क्रमशः 15,638 और 3,403 घंटे की उड़ान का अनुभव था.
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भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की पिछले हफ्ते जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में भी यही संकेत मिले थे कि टेक-ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजन के फ्यूल कटऑफ स्विच एक सेकंड के अंतर से बंद कर दिए गए, जिससे विमान की ईंधन सप्लाई पूरी तरह से कट गई. इसके बाद इंजन की पॉवर तेजी से गिरने लगी. कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग के अनुसार, एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने फ्यूल क्यों कट किया, जिस पर जवाब मिला – "मैंने नहीं किया."
हालांकि रिकॉर्डिंग में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि स्विच असावधानीवश दबा या जानबूझकर. लेकिन यह घटनाक्रम पूरे हादसे की तह तक जाने के लिए काफी अहम माना जा रहा है.
AAIB की रिपोर्ट के मुताबिक, इंजन के कटऑफ के बाद कोई इमरजेंसी कॉल या टेक्निकल अलर्ट नहीं भेजा गया. महज कुछ ही सेकंड्स में विमान हवा में अपनी गति खो बैठा और अहमदाबाद के बाहरी इलाके में एक रिहायशी क्षेत्र में क्रैश हो गया. इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई, जिनमें 229 यात्री, 12 क्रू मेंबर और ज़मीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे.
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हादसे के बाद एयर इंडिया ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने सभी Boeing 787-8 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच (FCS) की लॉकिंग मैकेनिज्म की जांच शुरू की. DGCA के निर्देश पर 14 जुलाई को यह प्रक्रिया पूरी की गई और कंपनी ने बताया कि किसी भी विमान में कोई तकनीकी समस्या नहीं पाई गई. एयर इंडिया ने पायलटों को भेजे गए एक इंटरनल कम्युनिकेशन में कहा:
"हमारी इंजीनियरिंग टीम ने सावधानीपूर्वक निरीक्षण के तहत सभी Boeing 787 विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की लॉकिंग मैकेनिज्म की जांच की. सभी जांचें पूरी हो चुकी हैं और कोई समस्या सामने नहीं आई."
इसके साथ ही कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सभी ड्रीमलाइनर विमानों में Throttle Control Module (TCM) का भी समयबद्ध तरीके से रि-प्लेसमेंट किया गया है, जो कि फ्यूल कंट्रोल स्विच का ही एक अहम हिस्सा है.
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वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय पायलटों के संगठन Federation of Indian Pilots (FIP) ने सख्त ऐतराज जताया है. उन्होंने जांच प्रक्रिया से पायलट प्रतिनिधियों को बाहर रखने पर असंतोष जताया है और आरोप लगाया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के हवाले से पायलटों को दोषी ठहराया जा रहा है.
FIP ने कहा, "शुरुआती रिपोर्ट में तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है और यह केवल कॉकपिट रिकॉर्डिंग के कुछ अंशों को आधार बनाकर पायलट की गलती साबित करने की कोशिश है. यह न तो निष्पक्ष है और न ही पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित."
उन्होंने मीडिया और अधिकारियों से अपील की कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए, क्योंकि इससे न केवल पेशेवर पायलटों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है, बल्कि उनके परिवार और सहयोगियों को भी मानसिक आघात होता है.
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AI-171 हादसे के बाद अब जांच की दिशा तकनीकी गड़बड़ी से हटकर मानव त्रुटि यानी पायलट की संभावित चूक की तरफ मुड़ती नजर आ रही है. लेकिन अभी इस पर अंतिम राय देने से पहले विस्तृत जांच और डाटा एनालिसिस जरूरी है.
FIP की इस चेतावनी और एयर इंडिया के तकनीकी निरीक्षण के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए, अब AAIB की फाइनल रिपोर्ट और ब्लैक बॉक्स डेटा का निष्कर्ष बेहद अहम होगा. फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह एक साधारण गलती थी, एक टूल की विफलता, या फिर एक त्रासदी जिसमें तकनीक, प्रक्रिया और मानव निर्णय एक साथ फेल हो गए.