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ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर अब पड़ेगा असर? (AI जनरेटेड फोटो)
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को महीनेभर से भी ज्यादा का समय हो गया है. इसका असर अब ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के एक्सपोर्ट मोर्चे पर दिख सकता है. ये एक ब्रोकरेज कंपनी ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा है. ब्रोकरेज कंपनी Antique Stock Broking के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए कुछ चुनौतियां खड़ी कर सकता है.
ब्रोकरेज कंपनी का कहना है कि अगर ये युद्ध जारी रहा तो ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक्सपोर्ट के मोर्चे पर दिक्कतें आ सकती हैं. ब्रोकरेज का कहना है कि इस युद्ध के जारी रहने से फ्रेट रेट (भाड़ा) बढ़ने, कमोडिटी की कीमतें महंगी होने और सप्लाई चेन में दिक्कतें आने की आशंका है.
हालांकि मार्च के महीने में ऑटो सेल्स देखेंगे तो पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने अच्छा प्रदर्शन किया है. मिडिल ईस्ट क्राइसिस के बावजूद, डोमेस्टिक पीवी सेगमेंट में 16.2% की बढ़ोतरी देखी गई है. लेकिन आने वाले समय में एक्सपोर्ट के मोर्चे पर दबाव देखने को मिल सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते ऑटो कंपनियां अपनी एनर्जी रिसोर्सेज में डायवर्सिफिकेशन लाने और सप्लाई चेन को फिर से संतुलित करने पर ध्यान दे सकती हैं.

अनिश्चितता बढ़ेगी: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव से खासकर टियर-2 और टियर-3 ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स पर ज्यादा अनिश्चितता बढ़ी है. इन कंपनियों को अपने प्रोडक्शन प्रोसेस को फिर से एडजस्ट करने में दिक्कतें आ सकती हैं.
OEMs पर असर सीमित: ब्रोकरेज का मानना है कि बड़े ऑटो निर्माता (OEMs) पर इसका असर सीमित रहेगा.
ग्रोथ पर फोकस: ब्रोकिंग फर्म को उम्मीद है कि ऑटो सेक्टर में 4 से 6 तिमाही तक डिमांड मजबूत बनी रहेगी और साल 2026 तक ग्रोथ जारी रहेगी. इसके बाद 2027-28 में ग्रोथ सामान्य हो सकती है.
सेल्स पर असर: FY26 के दूसरे आधे हिस्से में भारतीय ऑटो सेक्टर में तेजी देखी गई है, जिसका असर मार्च के आंकड़ों में भी नजर आया. अप्रैल से अगस्त 2025 के दौरान महंगाई और अफोर्डेबिलिटी की वजह से मांग कमजोर रही थी. लेकिन सितंबर 2025 में GST में बदलाव के बाद सेक्टर में तेज रिकवरी शुरू हुई.
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FY26 में घरेलू होलसेल वॉल्यूम करीब 8-9% सालाना (YoY) बढ़े. मार्च 2026 में Tata Motors, M&M, Maruti और Hyundai ने क्रमशः 28%, 25%, 11% और 6% की ग्रोथ दर्ज की.
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कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी अच्छा प्रदर्शन रहा. FY26 में घरेलू वॉल्यूम 12-13% बढ़े. मार्च 2026 में Volvo Eicher CV, Tata Motors और Ashok Leyland ने क्रमशः 14%, 18% और 5.5% की ग्रोथ दर्ज की.
हाल ही में कंपनियों की तरफ से ऑटो सेल्स के आंकड़ें जारी किए गए हैं. मार्च महीने के लिए ऑटो सेल्स के आंकड़ें सामने आए. मार्च 2026 में कुल डोमेस्टिक बिक्री 4.5 लाख यूनिट्स की रही.
| कार कंपनी | मार्च 2025 सेल्स | मार्च 2026 सेल्स | ग्रोथ |
| मारुति सुजुकी | 150000 | 166200 | 10.3% |
| टाटा मोटर्स पीवी | 51616 | 66192 | 28.2% |
| महिंद्रा एंड महिंद्रा | 48048 | 60272 | 25.4% |
| ह्युंदै | 51,820 | 55,064 | 6.3% |
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 मिडिल ईस्ट के युद्ध का भारतीय ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ सकता है?
इस युद्ध की वजह से एक्सपोर्ट पर दबाव आ सकता है. साथ ही फ्रेट रेट बढ़ सकते हैं, कच्चा माल महंगा हो सकता है और सप्लाई चेन में रुकावटें आ सकती हैं.
Q2 क्या घरेलू ऑटो सेल्स पर इसका असर पड़ा है?
अभी तक घरेलू बाजार मजबूत बना हुआ है. मार्च 2026 में पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में 16.2% की ग्रोथ देखने को मिली है.
Q3 किन कंपनियों या सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर हो सकता है?
टियर-2 और टियर-3 ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स पर ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि इन्हें प्रोडक्शन और सप्लाई चेन एडजस्ट करने में दिक्कत आ सकती है.
Q4 क्या बड़े ऑटो कंपनियों (OEMs) पर भी असर पड़ेगा?
ब्रोकरेज के मुताबिक, बड़े ऑटो निर्माताओं पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है.
Q5 इस स्थिति से निपटने के लिए ऑटो कंपनियां क्या कदम उठा सकती हैं?
कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने, नए सोर्स ढूंढने और एनर्जी रिसोर्सेज में डायवर्सिफिकेशन पर फोकस कर सकती हैं.