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स्क्रैप से उपलब्ध होने वाला प्रमुख कच्चा माल का रीसाइकिल किया जाएगा जिससे ऑटोमोबाइल की कीमतें 20-30 प्रतिशत कम होंगीं. (रॉयटर्स)
देशभर में भारी संख्या में बेकार पड़ी पुरानी गाड़ियों के निपटारे को लेकर सरकार की तैयारी चल रही है. ऐसी गाड़ियों को तोड़ने यानी स्क्रैपिंग को लेकर सरकार ने आज कहा कि इस बारे में एक पॉलिसी के लिए कैबिनेट सर्कुलर तैयार किया गया है. पीटीआई की खबर के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री वीके सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुरानी गाड़ियों के निपटारे के लिए स्वैच्छिक और पर्यावरण के मुताबिक इकोसिस्टम डेवलप करने को लेकर एक कैबिनेट सर्कुलर तैयार किया है.
सरकार ने पहले कहा था कि इस प्रस्तावित पॉलिसी के एक बार अप्रूव होने के बाद, सभी गाड़ियों पर लागू होगी. इस पॉलिसी को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के निर्देश पर सभी अंशधारकों के साथ नए दौर की सलाह के लिए भेजा गया है.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि एक बार पॉलिसी को मंजूरी मिलने के बाद, भारत ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरिंग का एक सेंटर बन सकता है, क्योंकि स्टील, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक के स्क्रैप से उपलब्ध होने वाला प्रमुख कच्चा माल का रीसाइकिल किया जाएगा जिससे ऑटोमोबाइल की कीमतें 20-30 प्रतिशत कम होंगीं.
सरकार ने 26 जुलाई, 2019 को बिजली से चलने वाली गाड़ियों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों को नष्ट करने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन का प्रपोजल दिया था.
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एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में, सरकार ने एक साल की मौजूदा समय-सीमा के बजाय हर छह महीने में 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट के रिन्युअल का प्रस्ताव किया है. इस संबंध में काफी समय से एक पॉलिसी की बात चल रही है.