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यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में Ola और Uber जैसी कंपनियों को संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा. बिना पंजीकरण, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी टैक्सी सेवा नहीं चल सकेगी.
यह फैसला राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद सामने आया. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की संशोधित नियमावली को उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाएगा.
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अब किसी भी टैक्सी को संचालन से पहले इन शर्तों को पूरा करना होगा:
सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम काफी हद तक कम हो सकेंगे.
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नई व्यवस्था के तहत कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस के लिए शुल्क भी देना होगा.
सरकार के अनुसार यह व्यवस्था कैब सेवाओं को औपचारिक और नियंत्रित ढांचे में लाने के लिए बनाई गई है.
परिवहन मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप विकसित करने की योजना बना रही है. इस ऐप के जरिए कैब ड्राइवर और वाहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध होगी.
इससे यात्री यात्रा से पहले ड्राइवर और वाहन की जानकारी आसानी से देख सकेंगे. सरकार का मानना है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और कैब सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा.
राज्य सरकार का कहना है कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इनके संचालन के लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा जरूरी था. नए नियम लागू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में चलने वाली कैब सेवाओं को तय मानकों का पालन करना होगा. इससे यात्रियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है.
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