OLA-UBER जैसे कैब एग्रीगेटर को एक और झटका; इस राज्य में रजिस्ट्रेशन, मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने OLA, UBER जैसे कैब एग्रीगेटर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है. कंपनी को एक और राज्य सरकार से बड़ा झटका लगा है. जानें आखिर क्या है पूरा मामला?
OLA-UBER जैसे कैब एग्रीगेटर को एक और झटका; इस राज्य में रजिस्ट्रेशन, मेडिकल और पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में Ola और Uber जैसी कंपनियों को संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा. बिना पंजीकरण, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी टैक्सी सेवा नहीं चल सकेगी.

यह फैसला राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद सामने आया. परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार की संशोधित नियमावली को उत्तर प्रदेश में भी लागू किया जाएगा.

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UP सरकार ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला?

  • परिवहन मंत्री ने बताया कि राज्य में अब कैब एग्रीगेटर कंपनियों को आधिकारिक लाइसेंस लेना होगा.
  • अभी तक इन कंपनियों के संचालन पर प्रत्यक्ष नियामक नियंत्रण नहीं था, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह व्यवस्था बदल जाएगी.
  • सरकार का मानना है कि इस कदम से यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और कैब सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा.
  • मंत्री के अनुसार, पहले यह पता लगाना मुश्किल होता था कि कौन ड्राइवर गाड़ी चला रहा है, लेकिन नए सिस्टम में ड्राइवर से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध होगी.

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लागू होंगे नियम

  • परिवहन मंत्री ने बताया कि यह फैसला मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 93 के तहत लिया गया है.
  • केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े नियमों में संशोधन किया था. अब उत्तर प्रदेश भी इन्हीं नियमों को अपनाएगा.
  • इस बदलाव के बाद राज्य में चलने वाली सभी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लाइसेंस लेना और तय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा.

बिना इन प्रक्रियाओं के नहीं चल सकेगी कैब

अब किसी भी टैक्सी को संचालन से पहले इन शर्तों को पूरा करना होगा:

  • वाहन का पंजीकरण (Registration)
  • वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट
  • ड्राइवर का मेडिकल टेस्ट
  • पुलिस वेरिफिकेशन
  • सभी दस्तावेजों की सरकारी रिकॉर्ड में एंट्री

सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिम काफी हद तक कम हो सकेंगे.

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लाइसेंस के लिए देना होगा शुल्क

नई व्यवस्था के तहत कैब एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस के लिए शुल्क भी देना होगा.

  • आवेदन शुल्क: ₹25,000
  • लाइसेंस फीस (50-100 या उससे अधिक गाड़ियों वाली कंपनियों के लिए): ₹5 लाख
  • लाइसेंस रिन्युअल: हर 5 साल में
  • रिन्युअल शुल्क: ₹5,000

सरकार के अनुसार यह व्यवस्था कैब सेवाओं को औपचारिक और नियंत्रित ढांचे में लाने के लिए बनाई गई है.

ड्राइवर की पूरी जानकारी होगी सार्वजनिक

परिवहन मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म या ऐप विकसित करने की योजना बना रही है. इस ऐप के जरिए कैब ड्राइवर और वाहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध होगी.

इससे यात्री यात्रा से पहले ड्राइवर और वाहन की जानकारी आसानी से देख सकेंगे. सरकार का मानना है कि इस कदम से पारदर्शिता बढ़ेगी और कैब सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा.

यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर

राज्य सरकार का कहना है कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन इनके संचालन के लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा जरूरी था. नए नियम लागू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश में चलने वाली कैब सेवाओं को तय मानकों का पालन करना होगा. इससे यात्रियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है.

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