हाइड्रोजन कार से संसद पहुंचे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, जीरो एमिशन और पॉल्यूशन भी नहीं

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी हाइड्रोजन से चलने वाली Toyota Mirai कार चलाकर संसद पहुंचे. उन्होंने बताया कि Toyota Kirloskar और NISE के बीच ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत MoU हुआ है.
हाइड्रोजन कार से संसद पहुंचे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, जीरो एमिशन और पॉल्यूशन भी नहीं

गुरुवार को संसद परिसर एक अनोखे नजारे का गवाह बना, जब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी हाइड्रोजन से चलने वाली कार चलाकर संसद पहुंचे. जैसे ही मंत्री की कार संसद भवन के पास रुकी, लोगों और मीडिया का ध्यान इस पर तुरंत आकर्षित हुआ. यह कार पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसका नाम ‘Mirai’ है, जिसका जापानी भाषा में अर्थ है - भविष्य.

जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत आज Toyota Kirloskar और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के बीच एक महत्वपूर्ण MoU साइन हुआ है, जिससे हाइड्रोजन आधारित वाहनों और तकनीक को भारत में बढ़ावा मिलेगा.

Toyota Mirai में क्या है खास?

Add Zee Business as a Preferred Source

प्रह्लाद जोशी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि Toyota Mirai एक ऐसी कार है जो पेट्रोल-डीजल नहीं बल्कि हाइड्रोजन पर चलती है और इससे सिर्फ वॉटर वेपर (जल वाष्प) ही उत्सर्जित होता है. उन्होंने कहा कि ये कार Mirai है, जिसका मतलब है Future.

उन्होंने आगे कहा कि ये जीरो-एमिशन वाहन है, नॉइज़-फ्री है और पूरी तरह हाइड्रोजन से चलती है. ये सिर्फ पानी छोड़ती है, प्रदूषण नहीं. इस कार का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारत ऑटोमोबाइल सेक्टर में अगले स्तर की स्वच्छ तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

हाइड्रोजन मिशन पर सरकार का फोकस

देश में ग्रीन फ्यूल का उत्पादन बढ़ाना
फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करना
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना

Toyota और NISE के बीच हुआ यह नया समझौता इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

एनर्जी इम्पोर्ट पर भारी खर्च

इसी दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऊर्जा आयात पर भारत के भारी खर्च की समस्या पर बात की. उन्होंने कहा कि भारत की 87% ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, जिस पर देश को हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं.

गडकरी ने सवाल उठाया, “क्या हमें यह पैसा बचाना नहीं चाहिए? यह पैसा देश के भीतर किसानों, युवाओं और इंडस्ट्री की प्रगति पर खर्च होना चाहिए.” नितिन गडकरी ने यह भी याद दिलाया कि जब सरकार ने मक्का से एथेनॉल बनाने की मंजूरी दी, तो इससे किसानों को सीधे लाभ मिला.

  • पहले मक्का का बाजार मूल्य था ₹1200 प्रति क्विंटल
  • MSP थी ₹1800 प्रति क्विंटल
  • एथेनॉल की मांग बढ़ते ही कीमतें बढ़कर ₹2600–2800 प्रति क्विंटल
  • इससे यूपी और बिहार में मक्का की खेती तीन गुना बढ़ गई और किसानों की आय में बड़ा इजाफा हुआ

हाइड्रोजन कार: स्वदेशी, किफायती और प्रदूषण मुक्त विकल्प

गडकरी ने Toyota Mirai की सराहना करते हुए कहा कि यह कार—

  • प्रदूषण को बिल्कुल खत्म करती है
  • आयात की जरूरत घटाती है
  • किफायती और स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है

Top 5 FAQs

1. प्रह्लाद जोशी किस कार को चलाकर संसद पहुंचे?

वे Toyota की हाइड्रोजन फ्यूल सेल कार Mirai को चलाकर संसद पहुंचे.

2. Toyota Mirai कैसे काम करती है?

ये कार हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलती है और केवल पानी के वाष्प का उत्सर्जन करती है.

3. Toyota और सरकार के बीच किस तरह का समझौता हुआ?

Toyota Kirloskar और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के बीच ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए MoU साइन हुआ है.

4. भारत ऊर्जा आयात पर कितना खर्च करता है?

भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये ऊर्जा आयात पर खर्च करता है.

5. एथेनॉल बनाने के लिए मक्का की मंजूरी से किसानों को क्या फायदा हुआ?

मक्का की कीमतें बढ़ीं, खेती तीन गुना बढ़ी और किसानों की आमदनी में बड़ा उछाल आया.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)

(ANI इनपुट के साथ)

RECOMMENDED

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6