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भारतीय वाहन उद्योग को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जवाबी शुल्क की घोषणा से कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है, क्योंकि इसमें वाहन क्षेत्र शामिल नहीं हैं. वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत से अमेरिका को वाहन निर्यात काफी सीमित है, इसलिए उद्योग पर शुल्क का खास असर नहीं पड़ेगा. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के महानिदेशक राजेश मेनन ने बयान में कहा कि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि वाहन इस आदेश में शामिल नहीं हैं क्योंकि वे पहले से ही धारा 232 के 25 प्रतिशत शुल्क के अधीन हैं, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के 26 मार्च, 2025 के आदेश में की गई थी.
उन्होंने कहा, “हमें नहीं लगता कि भारतीय वाहन उद्योग पर कोई खास प्रभाव पड़ेगा क्योंकि अमेरिका को इसका निर्यात सीमित है, लेकिन हम स्थिति पर नजर रखना जारी रखेंगे. वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों का मुकाबला करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने लगभग 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाए हैं. अमेरिका ने बुधवार को भारत पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा करते हुए कहा कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क लगाता है.
2 अप्रैल को अमेरिकी व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत “रियायती पारस्परिक शुल्क” लगाने की घोषणा की है, जो भारत द्वारा अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए 52 प्रतिशत शुल्क का आधा है. इस फैसले पर ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चर ऑफ इंडिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी.
ACMA की प्रेसिडेंट श्रद्धा सूरी मारवाह ने इस फैसले पर कहा कि हम अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन का फैसला समझते हैं. अमेरिका का टारगेट घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड असंतुलन को दूर करना है. उन्होंने आगे कहा कि ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, साथ ही स्टील और एल्युमीनियम उत्पाद, जो पहले से ही सेक्शन 232 के तहत 25 फीसदी शुल्क के अधीन हैं और जिनकी घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के 26 मार्च 2025 के आदेश में की गई थी, उन्हें इस नवीनतम आदेश में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका में 25% आयात शुल्क के अधीन किए जाने वाले ऑटो कंपोनेंट्स की विस्तृत सूची की प्रतीक्षा की जा रही है.