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भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण सीएनजी कारों की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. गाड़ी चलाने का कम खर्च और बेहतर माइलेज के चलते लोग सीएनजी कारों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. हालांकि, सीएनजी कारों के साथ हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है - बूट स्पेस यानी डिक्की में जगह की कमी. गाड़ी की डिक्की में रखा बड़ा सा सीएनजी सिलेंडर लगभग पूरे सामान रखने की जगह को खत्म कर देता है.
लेकिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक नई टेक्नोलॉजी ने इस समस्या का हल निकाला है. ये टेक्नोलॉजी है डुअल-सिलेंडर सीएनजी टैंक, जिसे भारत में सबसे पहले टाटा मोटर्स ने पेश किया और अब Hyundai India भी इसका इस्तेमाल कर रही है. यह टेक्नोलॉजी सीएनजी कारों की सबसे बड़ी कमी को दूर कर उन्हें पहले से कहीं ज्यादा व्यावहारिक और सुविधाजनक बनाती है.
डुअल-सिलेंडर सीएनजी टेक्नोलॉजी एक नया और अनोखा इंजीनियरिंग समाधान है, जिसमें कार की डिक्की में एक बड़े सिलेंडर के बजाय दो छोटे-छोटे सिलेंडर लगाए जाते हैं. पुरानी सीएनजी किट में लगभग 60 लीटर की क्षमता वाला एक बड़ा सिलेंडर बूट के बड़े हिस्से को घेर लेता था.
वहीं, डुअल-सिलेंडर सेटअप में 30-30 लीटर की क्षमता वाले दो पतले और छोटे सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं. इन सिलेंडरों को डिक्की के फर्श के नीचे एक विशेष हिस्से में बड़ी सफाई से फिट कर दिया जाता है. इस डिजाइन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि डिक्की का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह से खाली रहता है, जिससे आपको सामान रखने के लिए एक समतल और उपयोगी जगह मिल जाती है.
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जैसा कि हेडिंग में बताया गया है, यह टेक्नोलॉजी लंबी यात्रा पर जाने वालों के लिए एक वरदान की तरह है. पहले सीएनजी कार खरीदने वाले ग्राहक अक्सर शहर के अंदर ही इसे चला पाते थे क्योंकि बूट स्पेस न होने की वजह से वे परिवार के साथ छुट्टियों पर नहीं जा सकते थे. अगर किसी को सामान ले जाना होता था तो उसे कार की छत पर कैरियर लगवाना पड़ता था, जो न सिर्फ असुविधाजनक होता है बल्कि गाड़ी के माइलेज पर भी असर डालता है.
डुअल-सिलेंडर टेक्नोलॉजी ने इस पूरी स्थिति को बदल दिया है. अब आप अपनी सीएनजी कार में लगभग उतना ही सामान रख सकते हैं, जितना एक सामान्य पेट्रोल कार में रखा जा सकता है. इससे लंबी यात्राओं, वीकेंड पर घूमने जाने और पारिवारिक छुट्टियों पर जाना बेहद आसान हो गया है. अब आपको गाड़ी चलाने के कम खर्च के फायदे के साथ-साथ व्यावहारिकता से कोई समझौता करने की जरूरत नहीं पड़ती.
टाटा मोटर्स भारत में इस क्रांतिकारी टेक्नोलॉजी को लाने वाली पहली कंपनी है. टाटा ने अपनी कई लोकप्रिय कारों को इस टेक्नोलॉजी के साथ अपडेट किया है, जिससे उनकी उपयोगिता काफी बढ़ गई है.
टाटा मोटर्स की सफलता को देखते हुए, Hyundai India ने भी बाजार में मुकाबला करने के लिए इस टेक्नोलॉजी को अपना लिया है. कंपनी ने अपनी नई लॉन्च हुई छोटी एसयूवी में यह सुविधा दी है.
ह्युंदै एक्सटर टाटा पंच को सीधी टक्कर देती है. ह्युंदै ने इसे लॉन्च के समय ही फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी किट के साथ पेश किया, जिसमें डुअल-सिलेंडर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसके चलते एक्सटर में भी पंच की तरह काफी इस्तेमाल करने लायक बूट स्पेस मिलता है. यह टेक्नोलॉजी ह्युंदै के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि इससे पहले कंपनी की ग्रैंड आई10 नियोस और ऑरा जैसी सीएनजी कारों में पारंपरिक सिंगल सिलेंडर ही मिलता था. एक्सटर में 1.2-लीटर का इंजन है जो सीएनजी पर 68 bhp की पावर और 95.2 Nm का टॉर्क देता है.
Q1. डुअल-सिलेंडर सीएनजी टेक्नोलॉजी क्या है?
A1. ये एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें कार में एक बड़े सीएनजी सिलेंडर के बजाय दो छोटे सिलेंडर लगाए जाते हैं, जिससे डिक्की में सामान रखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है.
Q2. इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
A2. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये सीएनजी कार में बूट स्पेस की समस्या को खत्म कर देती है, जिससे कार लंबी यात्राओं और पारिवारिक उपयोग के लिए व्यावहारिक बन जाती है.
Q3. भारत में कौन सी कंपनियां यह टेक्नोलॉजी दे रही हैं?
A3. वर्तमान में, भारत में केवल टाटा मोटर्स और ह्युंदै इंडिया ही अपनी कारों में डुअल-सिलेंडर सीएनजी टेक्नोलॉजी की पेशकश कर रही हैं.
Q4. टाटा की किन कारों में यह ट्विन-सिलेंडर टेक्नोलॉजी मिलती है?
A4. टाटा मोटर्स अपनी पंच, अल्ट्रोज, टियागो और टिगोर जैसी कारों में iCNG ट्विन-सिलेंडर टेक्नोलॉजी देती है.
Q5. Hyundai की किस कार में डुअल-सिलेंडर सीएनजी टैंक मिलता है?
A5. Hyundai अपनी छोटी एसयूवी 'एक्सटर' (Exter) के सीएनजी वेरिएंट में डुअल-सिलेंडर टेक्नोलॉजी प्रदान करती है.
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