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साल 2025 भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ज्यादा फायदेमंद तो नहीं रहा, लेकिन औसत रहा. अगर 31 दिसंबर 2024 और 31 दिसंबर 2025 की तुलना की जाए, तो सेंसेक्स में करीब 9-10 प्रतिशत की सिंगल-डिजिट बढ़त देखने को मिली है. वहीं, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में कोई खास मजबूती नहीं दिखाई दी. कुल मिलाकर बाजार का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा है. ये बात मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने आईएएनएस से बात करते हुए कही.
मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने साल 2025 के भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी भी साल के आंकड़ों का विश्लेषण करते समय यह समझना जरूरी होता है कि उस पूरे कैलेंडर साल में क्या-क्या घटनाएं हुईं.
2025 में वैश्विक स्तर पर ट्रेड वॉर की शुरुआत हुई, जिसकी अगुवाई अमेरिका ने की. अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा, जिसका प्रभाव भारत पर भी देखने को मिला.
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उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी घटनाएं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया. वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में अस्थिरता बनी रही, जिससे निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता सीमित हो गई. इन सभी परिस्थितियों के बीच भारतीय शेयर बाजार का स्थिर बने रहना अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है.
एक्सपर्ट ने आईएएनएस से बात करते हुए ये भी स्वीकार किया कि अगर भारत की तुलना अन्य उभरते हुए बाजारों (एमर्जिंग मार्केट्स) से की जाए, तो भारतीय बाजार इस साल अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा.
इसके पीछे एक प्रमुख कारण ये रहा कि घरेलू बाजार के मूल्यांकन पहले से ही महंगे थे और बाकी उभरते बाजारों की तुलना में प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे. ऐसे में वैश्विक निवेशकों ने उन बाजारों का रुख किया जहां वैल्यूएशन अधिक आकर्षक थे, जिससे वहां के शेयर बाजारों में बेहतर तेजी देखने को मिली.
नए साल 2026 को लेकर एक्सपर्ट शाह ने सकारात्मक रुख बताया. उनका मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में यानी सेकंड हाफ में बाजार की असली मजबूती देखने को मिलेगी. उन्होंने कहा कि दूसरा हिस्सा भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए भारी काम करेगा और इस दौरान ग्रोथ में सुधार दिख सकता है.
उन्होंने ये भी कहा कि आने वाले समय में सेक्टर रोटेशन जरूर देखने को मिलेगा, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि अर्निंग ग्रोथ में सुधार की संभावना है. कमाई बढ़ने से शेयर बाजार को मजबूती मिलेगी और यही वजह है कि 2026 के वर्ष 2025 की तुलना में निवेशकों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होने की उम्मीद है.
Q1. साल 2025 में भारतीय शेयर बाजार का कुल प्रदर्शन कैसा रहा?
साल 2025 में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन औसत रहा. सेंसेक्स में करीब 9–10 प्रतिशत की सिंगल-डिजिट बढ़त देखने को मिली.
Q2. 2025 में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर क्यों कमजोर रहे?
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा मजबूती नहीं दिखी क्योंकि घरेलू बाजार के वैल्यूएशन पहले से ही महंगे थे और निवेशकों ने अन्य उभरते बाजारों की ओर रुख किया.
Q3. 2025 में बाजार पर किन वैश्विक घटनाओं का असर पड़ा?
वैश्विक ट्रेड वॉर की शुरुआत, अमेरिका के टैरिफ, ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दे और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया.
Q4. अन्य उभरते बाजारों की तुलना में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा?
2025 में भारतीय शेयर बाजार अन्य उभरते बाजारों की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा, क्योंकि भारत प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा था.
Q5. साल 2026 को लेकर शेयर बाजार का आउटलुक कैसा है?
मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह के मुताबिक, 2026 में खासतौर पर वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में अर्निंग ग्रोथ में सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे बाजार 2025 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.
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