देश में टू व्हीलर मार्केट का इकोनॉमी में बड़ा योगदान है. व्हीकल राइडिंग है तो रूल्स भी हैं. इन रूल्स को मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत तैयार किया गया है. देश में व्हीकल चलाना है तो इन नियमों का पालन जरूर करना होगा. हालांकि कई बार देखा गया है कि लोग ट्रैफिक नियमों (Traffic Rules) को फॉलो नहीं करते हैं. देश में टू-व्हीलर चलाने के लिए हेलमेट को पहनना जरूरी है. हेलमेट को सेफ्टी के लिहाज से अनिवार्य किया गया है. अगर हेलमेट (Helmet) नहीं पहना है तो ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है. लेकिन इसके बाद भी एक ऐसा वर्ग है, जिसे पूरी तरह से हेलमेट ना पहनने की आजादी है. ये आजादी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दी गई है. ये लोग अगर हेलमेट नहीं पहनेंगे तो भी इनका चालान नहीं कटेगा.
1/5मोटर व्हीकल एक्ट का सेक्टशन 129 कहता है कि जो लोग सिख कम्यूनिटी से ताल्लुक रखते हैं, सिर्फ उन्हें ही हेलमेट ना पहनने की आजादी है. लेकिन इसमें भी एक शर्त है.
2/5मोटर व्हीकल एक्ट के तहत शर्त ये है कि सिख कम्यूनिटी में जो लोग पगड़ी पहन रहे हैं, सिर्फ उन्हें ही हेलमेट ना पहनने की आजादी है. नियम ये है कि मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाते वक्त अगर पगड़ी पहनी हुई है तो ही हेलमेट ना पहनने पर चालान नहीं कटेगा.
3/5इसके अलावा मोटर व्हीकल एक्ट के इसी सेक्शन के तहत 4 साल से कम उम्र के बच्चों को हेलमेट ना पहनने की आजादी है. लेकिन 4 साल से ज्यादा आयु के बच्चों को हेलमेट जरूर पहनना होगा.
4/5मोहर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत हेलमेट ना पहनने पर चालान काटने का प्रावधान है. अगर कोई शख्स बिना हेलमेट पहने राइ़ड करते हुए दिखता है तो उसका 1000 रुपए का चालान कट जाता है. इसके अलावा तीने महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस भी सस्पेंड किया जा सकता है.
5/5कई बार देखा गया है कि लोग हेलमेट पहन लेते हैं लेकिन स्ट्रैप नहीं लगाते. ऐसा होने पर भी ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है. तो सिर्फ हेलमेट पहनना जरूरी नहीं है लेकिन इसके साथ हेलमेट की स्ट्रैप लगाना भी जरूरी है.