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सर्दियों के मौसम में घना कोहरा नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. कम विजिबिलिटी की वजह से हर साल कई हादसे होते हैं और ट्रैफिक भी बुरी तरह प्रभावित होता है. इसी खतरे को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI (National Highways Authority of India) ने समय रहते जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
NHAI का फोकस साफ है कि कोहरे के दौरान भी हाईवे पर चलने वाले लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित माहौल दिया जाए. इसके लिए विजिबिलिटी बढ़ाने और लोगों को सतर्क करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है. पूरी योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है, ताकि काम जमीन पर साफ दिखे और उसका असर भी तुरंत नजर आए.
NHAI ने सबसे पहले सड़क से जुड़ी बुनियादी चीजों को दुरुस्त करने पर काम शुरू किया है. कई जगहों पर रोड साइन गायब या खराब हो चुके थे, जिन्हें दोबारा लगाया जा रहा है. जिन सड़कों पर लेन मार्किंग हल्की पड़ गई थी, वहां नई और साफ मार्किंग की जा रही है.
इसके अलावा हाईवे पर लगे रोड स्टड्स और रिफ्लेक्टिव मार्कर भी लगाए जा रहे हैं ताकि ड्राइवर को रास्ता साफ दिखे. मेटल क्रैश बैरियर पर पीले रंग के रिफ्लेक्टिव स्टिकर लगाए जा रहे हैं, जिससे रात और कोहरे में उनकी पहचान आसान हो सके. कंस्ट्रक्शन वाले हिस्सों में खास इंतजाम किए गए हैं.
सिर्फ सड़क सुधार काफी नहीं है, इसलिए NHAI ने लोगों को जागरूक करने पर भी जोर दिया है. इसके तहत हाईवे पर वेरिएबल मैसेज साइन यानी VMS (Variable Message Signs) लगाए जा रहे हैं. इन पर फॉगी वेदर अलर्ट और स्पीड लिमिट की जानकारी दी जाएगी.
कुछ जगहों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से ड्राइवरों को सीधे चेतावनी दी जाएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक बिलबोर्ड, रेडियो और सोशल मीडिया के जरिए भी पब्लिक सर्विस मैसेज चलाए जाएंगे. गाड़ियों पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि कोहरे में वाहन जल्दी नजर आएं.
NHAI ने अपने फील्ड ऑफिस को हफ्ते में एक बार रात के समय हाईवे इंस्पेक्शन करने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद यह देखना है कि कहां विजिबिलिटी कम है और कहां अतिरिक्त इंतजाम की जरूरत है.
घने कोहरे वाले इलाकों में हाईवे पेट्रोलिंग व्हीकल तैनात की जाएंगी. इन गाड़ियों में ब्लिंकिंग बैटन होंगे, जिससे ट्रैफिक को सही दिशा दी जा सके. हाईवे पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिफ्लेक्टिव जैकेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है.
NHAI स्थानीय पुलिस, एंबुलेंस सर्विस और नगर निकाय के साथ मिलकर काम करेगा. कोहरे से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में तेजी से मदद पहुंचाने के लिए जॉइंट ड्रिल भी की जाएगी. इससे तालमेल बेहतर होगा और समय की बचत होगी.
इसके साथ ही NHAI ने अपने अधिकारियों को हादसों वाले ब्लैक स्पॉट सुधारने के लिए वित्तीय अधिकार भी दिए हैं, ताकि बिना देरी जरूरी काम किया जा सके.
NHAI ने हाईवे पर चलने वालों से भी सतर्क रहने की अपील की है.
सर्दियों में कोहरा एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सही तैयारी से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. NHAI के ये कदम दिखाते हैं कि अब फोकस सिर्फ नियमों पर नहीं, बल्कि जमीन पर सुरक्षा बढ़ाने पर है. अगर ड्राइवर भी इन उपायों का साथ दें, तो नेशनल हाईवे पर सफर ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सकता है.
कम विजिबिलिटी की वजह से समय पर ब्रेक लगाना मुश्किल हो जाता है.
रिफ्लेक्टिव साइन, मार्किंग और लाइटिंग से.
कोहरे में 30 किमी प्रति घंटा या उससे कम.
हां, हल्का कोहरा भी दूरी का अंदाजा बिगाड़ देता है.
इससे गाड़ी दूर से नजर आ जाती है.
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