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नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है. सरकार टोल वसूली की प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और हाई-टेक बनाने जा रही है. NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) ने पाया है कि कई वाहनों पर लगे FASTag का नंबर, गाड़ी की असली नंबर प्लेट से मेल नहीं खाता है. इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए अब युद्ध स्तर पर काम शुरू हो गया है.
NHAI ने सभी FASTag जारी करने वाले बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने द्वारा जारी किए गए हर FASTag के वाहन पंजीकरण संख्या (VRN) की जांच करें. अगर डेटाबेस में दर्ज नंबर और गाड़ी का असली नंबर अलग पाया जाता है, तो उस FASTag को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.
ऐसा कई बार देखा गया है कि टोल प्लाजा पर लगे रीडर जब FASTag स्कैन करते हैं, तो सिस्टम में कोई और नंबर दिखता है, जबकि गाड़ी पर नंबर प्लेट कुछ और होती है. इसके मुख्य कारण हैं:
पुराने FASTag: 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस के साथ एकीकरण से पहले जारी किए गए टैग में मैनुअल एंट्री के कारण गलतियां रह गईं.
फर्जीवाड़ा: कुछ लोग जानबूझकर गलत कैटेगरी या गलत नंबर के टैग इस्तेमाल कर टोल चोरी की कोशिश करते हैं.
रेवेन्यू का नुकसान: गलत नंबर की वजह से सरकार को मिलने वाले टोल टैक्स में हेराफेरी होती है.
सरकार बहुत जल्द मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग शुरू करने वाली है. इस व्यवस्था में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा. गाड़ियां अपनी सामान्य रफ्तार से गुजरेंगी और कैमरे व सेंसर अपने आप टोल काट लेंगे.
खास बात है कि इस सिस्टम की सफलता पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि कैमरे द्वारा पढ़ा गया नंबर और FASTag का नंबर एकदम सटीक हो. अगर डेटा गलत होगा, तो ई-नोटिस भेजने में दिक्कत आएगी.
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इस कदम से ईमानदार यात्रियों को कई फायदे होंगे:
झंझट मुक्त सफर: टोल पर नंबर मिसमैच होने की वजह से होने वाली बहस और देरी खत्म होगी.
सटीक बिलिंग: आपके खाते से उतना ही पैसा कटेगा, जितना आपकी गाड़ी की कैटेगरी के लिए तय है.
बेहतर सड़कें: टोल चोरी रुकने से सरकार के पास ज्यादा फंड होगा, जिससे हाईवे का रखरखाव बेहतर होगा.
अगर आपने अपनी गाड़ी के लिए सही जानकारी देकर अधिकृत बैंक से टैग लिया है, तो डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आपका टैग 'वाहन' डेटाबेस के जुड़ने से पहले का है या उसमें कोई टाइपिंग एरर है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी है.
NHAI का यह फैसला हाईवे पर तकनीकी क्रांति लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. डेटा की सटीकता न केवल सुरक्षा बढ़ाएगी बल्कि भविष्य में जीपीएस आधारित टोलिंग या बिना बैरियर वाले टोल प्लाजा का रास्ता भी साफ करेगी. अगर आपको संदेह है, तो तुरंत अपने बैंक के ऐप या पोर्टल पर जाकर अपनी गाड़ी का नंबर चेक कर लें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या गलत नंबर वाले FASTag पर जुर्माना लगेगा?
हां, मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत गलत जानकारी वाले टैग पर कानूनी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग हो सकती है.
Q2 मैं अपने FASTag का VRN कैसे चेक कर सकता हूं?
आप अपने FASTag जारीकर्ता बैंक की मोबाइल ऐप, वेबसाइट या NHAI के 'My FASTag' ऐप पर जाकर लॉगिन करके अपनी जानकारी देख सकते हैं.
Q3 अगर मेरा टैग ब्लैकलिस्ट हो गया तो क्या करें?
आपको अपने बैंक से संपर्क कर केवाईसी (KYC) अपडेट करानी होगी और सही वाहन दस्तावेजों के साथ नया टैग लेना पड़ सकता है.
Q4 मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है जहां बिना रुके या बैरियर के हाईवे पर गाड़ियों से सीधे टोल वसूला जाता है.
Q5 क्या पुराने टैग को बदलना जरूरी है?
यदि आपका पुराना टैग सही काम कर रहा है और डेटा सही है तो बदलने की जरूरत नहीं है, लेकिन बैंक की तरफ से सत्यापन मांगे जाने पर विवरण देना अनिवार्य है.