अब आएगी EV सेक्टर में असली क्रांति, पहली बार मोदी सरकार ट्रकों पर देने जा रही है Subsidy, सामने आई पूरी डीटेल

भारत सरकार ने EV को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है. भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने ‘पीएम ई-ड्राइव स्कीम’ के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रक) को प्रोत्साहन देने की योजना की शुरुआत की है.
अब आएगी EV सेक्टर में असली क्रांति, पहली बार मोदी सरकार ट्रकों पर देने जा रही है Subsidy, सामने आई पूरी डीटेल

मोदी सरकार EV ट्रकों पर देने जा रही है Subsidy

भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है. भारी उद्योग और इस्पात मंत्री (Union Minister for Heavy Industries and Steel) एच. डी. कुमारस्वामी ने ‘पीएम ई-ड्राइव स्कीम’ के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रक) को प्रोत्साहन देने की योजना की शुरुआत की है. यह पहली बार है जब केंद्र सरकार ने भारी माल ढोने वाले ट्रकों के लिए सब्सिडी योजना शुरू की है. इस स्कीम का मकसद देश को प्रदूषण मुक्त बनाने और साल 2070 तक नेट-ज़ीरो के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है.

पर्यावरण और ट्रांसपोर्ट दोनों के लिए अहम योजना

इस स्कीम को भारत की जलवायु नीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. भारी डीजल ट्रकों से निकलने वाला धुआं न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि शहरों की हवा को भी जहरीला बनाता है. ऐसे में सरकार की योजना है कि धीरे-धीरे इन डीजल ट्रकों की जगह इलेक्ट्रिक ट्रक लिए जाएं. सरकार ने शुरुआत में देशभर में 5,600 ई-ट्रक लगाने का लक्ष्य रखा है. इनमें से 1,100 ट्रक दिल्ली में तैनात किए जाएंगे, जिससे राजधानी की हवा में सुधार हो सकेगा.

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कौन से ट्रक होंगे इस स्कीम में शामिल?

यह योजना दो तरह के भारी ट्रकों पर लागू होगी-

N2 कैटेगरी के ट्रक, जिनका कुल वजन 3.5 टन से 12 टन के बीच होता है.

N3 कैटेगरी के ट्रक, जिनका वजन 12 टन से लेकर 55 टन तक होता है.

इलेक्ट्रिक ट्रक के वजन के हिसाब से सब्सिडी मिलेगी और एक ट्रक पर अधिकतम 9.6 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है. यह रकम सीधे ट्रक की खरीद कीमत में घटाई जाएगी और बाद में निर्माता कंपनी को सरकार की ओर से भुगतान किया जाएगा.

वारंटी और पुराना ट्रक स्क्रैप करना जरूरी

सरकार ने इस स्कीम के तहत खरीदे गए ई-ट्रकों के लिए वारंटी की शर्त भी तय की है. बैटरी के लिए 5 साल या 5 लाख किलोमीटर तक की वारंटी होगी. वहीं वाहन और मोटर के लिए 2.5 लाख किलोमीटर या 5 साल की वारंटी देनी होगी. साथ ही योजना का फायदा उठाने के लिए पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों को स्क्रैप करना जरूरी होगा.

किस सेक्टर को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह योजना खासतौर पर सीमेंट, स्टील, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर के लिए फायदेमंद होगी, जहां हर दिन भारी ट्रकों की जरूरत होती है. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने पहले ही अगले दो साल में 150 ई-ट्रक खरीदने का ऐलान किया है. साथ ही कंपनी अब अपने सभी यूनिट्स में कम से कम 15 फीसदी गाड़ियां इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य बना रही है.

मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

इस योजना से देश में ई-ट्रक बनाने वाली कंपनियों को भी फायदा मिलेगा. टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियां पहले से ही इलेक्ट्रिक ट्रक का निर्माण कर रही हैं. अब सरकारी प्रोत्साहन मिलने से ये कंपनियां और आगे बढ़ेंगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी.

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