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भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का चलन बढ़ने के साथ ही अब लोग सिर्फ यह नहीं पूछते कि ये कितनी दूर जा सकती है बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि यह कितने समय तक चलेगी? इस सवाल का सबसे अहम जवाब इलेक्ट्रिक व्हीकल के सबसे जरूरी हिस्से बैटरी में छिपा है. आजकल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में मुख्य रूप से दो तरह की बैटरी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती हैं. पहली निकेल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) और दूसरी लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP). इन दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं और बैटरी का चुनाव ही गाड़ी की लंबी परफॉर्मेंस तय करता है.
कुछ कंपनियां अब LFP बैटरी का इस्तेमाल कर रही हैं. इन्हीं में से एक है सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया, जिसने अपने पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर - सुजुकी ई-एक्सेस (Suzuki e-ACCESS) में यह तकनीक शामिल की है. आइए, जानते हैं इसकी खासियत के बारे में.
लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी रोजाना के सफर के लिए काफी फायदेमंद है.
1. लंबी लाइफ: LFP बैटरी की लाइफ आमतौर पर NMC बैटरी से दो से तीन गुना ज्यादा होती है.
2. ज्यादा सुरक्षित: LFP बैटरी में ओवरहीटिंग या आग लगने का खतरा कम होता है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है.
3. ड्यूरेबिलिटी: हालांकि, NMC की तुलना में LFP बैटरी थोड़ी भारी और कम ऊर्जा वाली होती है, लेकिन यह लंबे समय तक बेहतर काम करती है. यह उन राइडर्स के लिए सबसे अच्छी है, जो एक बार चार्ज करने पर बहुत ज्यादा रेंज के बजाय बैटरी के ड्यूरेबिलिटी को ज्यादा अहमियत देते हैं.

यह ग्राफ LFP और NMC बैटरियों की कैपेसिटी में समय के साथ आने वाली कमी की तुलना करता है.
LFP बैटरी (जिसका इस्तेमाल सुजुकी e-ACCESS में हुआ है) (ब्लू लाइन): यह लाइन दिखाती है कि LFP बैटरी की कैपेसिटी धीरे-धीरे और स्थिर रूप से कम होती है. इसका मतलब है कि यह लंबे समय तक या कई चार्जिंग साइकल के बाद भी अपनी ज़्यादातर क्षमता बनाए रखती है.
NMC बैटरी (डॉटेड लाइन): यह लाइन दिखाती है कि NMC बैटरी की क्षमता तेजी से कम होती है. जैसे-जैसे चार्जिंग साइकल बढ़ती हैं, यह बैटरी अपनी क्षमता जल्दी खो देती है.
LFP बैटरी के साथ, बैटरी की लाइफ और चार्जिंग साइकिल NMC बैटरी की तुलना में दोगुनी होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि ग्राहक को बैटरी कम बदलनी पड़ेगी, लंबे समय में खर्च कम होगा और राइडर को सुकून मिलेगा.
इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाने वालों के लिए, बैटरी बदलना मेंटेनेंस का सबसे महंगा हिस्सा होता है. एक स्कूटर जो शुरू में 100 किमी की रेंज देता है, अगर उसकी बैटरी जल्दी खराब हो जाती है, तो समय के साथ उसकी रेंज काफी कम हो सकती है. Suzuki e-ACCESS जैसी LFP बैटरी वाले वाहनों में, रेंज लंबे समय तक बनी रहती है. राइडर्स को सालों तक एक जैसी रेंज मिलती रहती है, जिससे बैटरी बदलने की जरूरत देर से पड़ती है और स्कूटर की कुल उम्र बढ़ जाती है.

यह ग्राफ दिखाता है कि जैसे-जैसे गाड़ी ज्यादा चलती है, एक बार चार्ज करने पर मिलने वाली रेंज कैसे बदलती है. इसमें NMC और LFP बैटरियों के परफॉर्मेंस की तुलना की गई है.
NMC बैटरी (रेड डॉटेड लाइन): यह लाइन बताती है कि NMC बैटरी शुरू में तो ज़्यादा रेंज देती है, लेकिन जैसे-जैसे गाड़ी ज्यादा चलती है, इसकी रेंज तेजी से घटने लगती है.
LFP बैटरी (ब्लू लाइन): यह लाइन Suzuki e-ACCESS की LFP बैटरी को दर्शाती है. यह शुरू में थोड़ी कम रेंज के साथ शुरू होती है, लेकिन समय के साथ यह ज्यादा स्थिर और एक जैसी बनी रहती है.
उदाहरण के तौर पर शुरू में, NMC बैटरी वाला स्कूटर LFP बैटरी वाले स्कूटर से थोड़ी ज्यादा रेंज दे सकता है. लेकिन, कुछ समय बाद, LFP बैटरी की रेंज NMC बैटरी की रेंज के बराबर हो जाती है. इसके बाद, LFP अपनी रेंज बनाए रखती है, जिससे यह समय के साथ साफ तौर पर बेहतर साबित होती है.
भले ही रेंज तुलना का एक अहम पहलू है, लेकिन यही सब कुछ नहीं है. यह मानते हुए कि भारत में ज्यादातर लोग रोजाना कम दूरी का ही सफर करते हैं, कुछ कंपनियां सिर्फ ज्यादा रेंज दिखाने के बजाय रोजमर्रा के परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रही हैं. सुजुकी ने e-ACCESS के साथ यही तरीका अपनाया है. इसकी 3.1 kWh बैटरी से 95 किमी की रेंज मिलती है. इस्तेमाल के आंकड़ों के मुताबिक, एक औसत भारतीय राइडर रोजाना करीब 30 किमी का सफर करता है, जिसका मतलब है कि ज्यादातर लोग एक बार चार्ज करने के बाद तीन दिन तक स्कूटर चला सकते हैं.
बैटरी की तकनीक के साथ-साथ, बैटरी की सुरक्षा और टेस्टिंग भी उतनी ही जरूरी है. खासकर सुजुकी e-ACCESS जैसे स्कूटर्स में, बैटरी को एक मजबूत एल्यूमीनियम केस में रखा गया है और इसे स्कूटर के फ्रेम में लगाया गया है. इससे यह बाहरी नुकसान से कम प्रभावित होती है और आग लगने जैसी घटनाओं से ज्यादा सुरक्षित रहती है.
इसके अलावा, हर e-ACCESS स्कूटर और उसकी बैटरी को कड़े टेस्टिंग प्रोटोकॉल से गुजारा जाता है, जिसमें ज्यादा गर्मी और ठंडे तापमान, गिरने, वाइब्रेशन, पानी में डूबने, मोटर बेंच, कुचलने और छेद करने वाले टेस्ट शामिल हैं. यह सुनिश्चित करता है कि वे असली दुनिया की राइडिंग की मुश्किलों का सामना कर सकें.
(अस्वीकरण: ये आर्टिकल ब्रांड डेस्क से है. कृपया अपनी समझदारी से निर्णय लें.)