&format=webp&quality=medium)
पॉल्यूशन को कम करने और कार्बन एमिशन जीरो करने के मकसद से केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इसी सिलसिले में आज देश का पहला हाइड्रोजन ट्रक लॉन्च कर दिया गया है. टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने देश का पहला 100 फीसदी हाइड्रोजन से चलने वाला ट्रक पेश कर दिया है. ये ट्रक पूरी तरह से हाइड्रोजन से चलेगा. आज से देश के पहले हाइड्रोजन ट्रक का ट्रायल हो चुका है. ये ट्रक दो तरह की नई तकनीक पर आधारित होगा. इसके लिए IOCL के लिए साथ करार किया गया है. नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत पूरी तरह हाइड्रोजन से चलेंगे. इतना ही नहीं, हाइड्रोजन से बिजली पैदा होगी और उससे इलेक्ट्रिक ट्रक का संचालन होगा. बाकी दोनों ट्रक में CNG की तरह हाइड्रोजन भरी जाएगी.
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी दिखाएंगे ने इस पायलट प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई. इस प्रोजेक्ट के तहत 16 ट्रक और बसों को चलाए जाने की योजना है. अगले 18 महीनों तक देश के चार कॉरिडोर में हाइड्रोजन बस/ ट्रक चलेंगी. इसके डाटा और परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर जल्द सड़क पर हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट होगा और डाटा के आधार पर हाइड्रोजन पोर्ट्स, स्टेशन बनाए जाएंगे.
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देते हुए सरकार ने बसों और ट्रकों में हाइड्रोजन के इस्तेमाल के लिए पांच पायलट परियोजनाएं शुरू की हैं. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस मिशन के तहत ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हाइड्रोजन परियोजनाओं को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. विस्तृत जांच के बाद मंत्रालय ने कुल 37 वाहनों (बसों और ट्रकों) और 9 हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशनों वाली पांच पायलट परियोजनाओं को मंजूरी दी है.
ट्रायल के लिए जिन वाहनों को चुना जाएगा, उनमें 15 हाइड्रोजन ईंधन सेल बेस्ड वाहन और 22 हाइड्रोजन अन्तर्दहन इंजन आधारित वाहन शामिल हैं. ये वाहन देश भर में 10 अलग-अलग मार्गों पर चलेंगे, जिसमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, पुणे-मुंबई, जमशेदपुर-कलिंग नगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडापल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और एनएच-16 विशाखापत्तनम-बय्यावरम शामिल हैं.
मंत्रालय ने कहा कि परियोजनाएं टाटा मोटर्स लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एनटीपीसी, एएनईआरटी, अशोक लीलैंड, एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल जैसी प्रमुख कंपनियों को दी गई हैं. चुनी गई परियोजनाओं के लिए सरकार की ओर से कुल वित्तीय सहायता लगभग 208 करोड़ रुपये होगी. इन पायलट परियोजनाओं के अगले 18-24 महीनों में चालू होने की संभावना है.