इस देश में बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क शुरू करेगी Sun Mobility, भारत में भी देगी सर्विस

SUN Mobility की स्थापना 2017 में SUN Group और Maini Group ने की थी. यह कंपनी आज भारत के 23 से ज्यादा शहरों में 900 से अधिक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन चला रही है और 50,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनी तकनीक से ऊर्जा दे रही है.
इस देश में बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क शुरू करेगी Sun Mobility, भारत में भी देगी सर्विस

भारत की अग्रणी बैटरी स्वैपिंग कंपनी SUN Mobility ने अफ्रीका में अपने विस्तार की घोषणा की है. इस काम के लिए अफ्रीका की जलवायु-केन्द्रित निवेश संस्था Helios Climate और Private Infrastructure Development Group (PIDG) ने मिलकर कंपनी में बड़ा निवेश किया है. इस निवेश के बाद SUN Mobility ने पिछले एक साल में कुल करीब 135 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1120 करोड़) जुटाए हैं. इस निवेश से SUN Mobility अफ्रीका में सबसे बड़ा बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क तैयार करेगी और भारत में भी अपनी सेवाओं का और विस्तार करेगी.

SUN Mobility के 900 से ज्यादा स्वैपिंग स्टेशन

SUN Mobility की स्थापना 2017 में SUN Group और Maini Group ने की थी. यह कंपनी आज भारत के 23 से ज्यादा शहरों में 900 से अधिक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन चला रही है और 50,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनी तकनीक से ऊर्जा दे रही है.

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कंपनी की बैटरियां दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया और भारी वाहनों (HEVs) में भी उपयोग हो सकती हैं. इसकी तकनीक ओपन आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिससे अलग-अलग कंपनियों के वाहन भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

क्यों खास है ये साझेदारी?

Helios Climate के पार्टनर तवराज बंगा ने कहा, "SUN Mobility की तकनीक बहुत अलग और प्रभावशाली है. यह अफ्रीका जैसे उभरते बाजारों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज़ी से बढ़ाने में मदद कर सकती है." इसके अलावा SUN Mobility के चेयरमैन चेतन मैनी ने कहा, "हमने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो तेज़, सस्ता और स्केलेबल है. भारत में हर महीने 14 लाख से ज्यादा बैटरी स्वैप हो रहे हैं और अब हम इसी मॉडल को अफ्रीका जैसे उभरते देशों में लागू करेंगे."

अफ्रीका में क्यों लगेगा प्लांट

अफ्रीका में दोपहिया और तिपहिया वाहन बहुत उपयोग में लाए जाते हैं और ये लगभग 5% कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार हैं. ऐसे में स्वच्छ और सस्ते मोबिलिटी विकल्पों की जरूरत है. SUN Mobility का बैटरी स्वैपिंग मॉडल वहां की आवश्यकताओं के अनुसार बहुत उपयुक्त है. इसके अलावा, कंपनी की तकनीक बैटरी को वाहन से अलग करती है, जिससे EV की कीमत कम होती है और ज्यादा लोगों के लिए यह विकल्प सुलभ हो जाता है.

इस निवेश से SUN Mobility न सिर्फ अफ्रीका बल्कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी. 2027 से कंपनी अपने सभी ई-वाहनों में लिथियम आयन बैटरी लगाएगी, जिससे प्रदर्शन और पर्यावरणीय लाभ दोनों बढ़ेंगे. ये साझेदारी अफ्रीका में स्वच्छ और सस्ती परिवहन व्यवस्था की नींव रखेगी और भारत की तकनीक को वैश्विक मंच पर और मजबूत करेगी.

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