CAFE-3 नियमों पर सरकार और ऑटो इंडस्ट्री हुई सहमत, जानें क्या है ये और कैसे कम होगा पॉल्यूशन?

CAFE-3 नॉर्म्स को लेकर सरकार और ऑटो इंडस्ट्री दोनों साथ आ गई हैं. दोनों की सहमति बनी है और नया नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा. जानें ये क्या है?
CAFE-3 नियमों पर सरकार और ऑटो इंडस्ट्री हुई सहमत, जानें क्या है ये और कैसे कम होगा पॉल्यूशन?

CAFE-3 के नियमों पर सरकार और ऑटो इंडस्ट्री आए साथ (AI जनरेटेड फोटो)

देश में कार खरीदने और बनाने के तरीके में बड़ा बदलाव आने वाला है. सरकार और ऑटो इंडस्ट्री के बीच CAFE-3 (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशियंसी) नियमों को लेकर सहमति बन गई है. ये नए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और कंपनियों को अपनी गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम करना होगा. इसे लेकर जल्द ही नया नोटिफिकेशन भी जारी हो सकता है.

बता दें कि देश में पॉल्यूशन का स्तर लगातार बढ़ रहा है. इस बढ़ते पॉल्यूशन को रोकने के लिए सरकार की ओर से लगातार कई कदम उठाए जा रहे हैं. CAFE-3 नॉर्म्स भी इस सिलसिले में लाया जा रहा है. इससे इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कार को ज्यादा प्रमोट किया जाएगा.

क्या हैं CAFE-3 norms?

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CAFE यानी Corporate Average Fuel Economy ऐसे नियम होते हैं, जिनके तहत कार कंपनियों को अपनी सभी गाड़ियों का औसत माइलेज और CO2 उत्सर्जन तय सीमा के अंदर रखना होता है.

आसान भाषा में समझें तो अब हर एक कार नहीं, बल्कि कंपनी की पूरी गाड़ियों का कुल प्रदूषण देखा जाएगा. अगर औसत ज्यादा हुआ, तो कंपनी पर दबाव बढ़ेगा.

डिजाइन और प्लानिंग में क्या बदलेगा?

अब तक कारों के साइज के आधार पर नियम तय होते थे, लेकिन CAFE-3 में फोकस पूरी fleet के एमिशन पर रहेगा. यानी बड़ी SUV या छोटी कार, दोनों को मिलाकर कंपनी को कुल प्रदूषण कम करना होगा.

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इससे कंपनियां ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट और कम प्रदूषण वाली गाड़ियों पर ध्यान देंगी. डिजाइन में भी हल्के मटेरियल और बेहतर एयरोडायनामिक्स देखने को मिल सकते हैं.

इंजन और फ्यूल पर क्या असर?

सरकार ने कंपनियों को E25 fuel के लिए तैयारी शुरू करने को कहा है. E25 का मतलब है पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिलाना.

इसके अलावा flex-fuel इंजन पर भी जोर रहेगा, जो पेट्रोल और एथेनॉल दोनों पर चल सकते हैं.
सरकार भविष्य में 20% से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग पर भी विचार कर रही है.
सीधे शब्दों में, आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के अलावा वैकल्पिक फ्यूल ज्यादा अहम हो जाएंगे.

फीचर्स और टेक्नोलॉजी में क्या नया?

CAFE-3 नॉर्म्स के तहत सरकार Electric Vehicles और Hybrid गाड़ियों को बढ़ावा देगी.
इसके लिए "super credits" देने पर विचार हो रहा है.

मतलब अगर कोई कंपनी ज्यादा EV या Hybrid बेचती है, तो उसे एमिशन टारगेट्स पूरा करने में अतिरिक्त फायदा मिलेगा.

इसके अलावा:

  • EV और Hybrid टेक्नोलॉजी पर जोर
  • फ्यूल सेविंग टेक्नोलॉजी
  • कम CO2 उत्सर्जन वाले इंजन

कंपनियों के लिए क्या चुनौती?

नए नियमों के तहत कंपनियों को FY27 में 113 gCO2/km से घटाकर FY32 तक 78.9 gCO2/km तक लाना होगा.

हालांकि सरकार का कहना है कि पेनल्टी देना मकसद नहीं है, बल्कि कंपनियों को साफ और बेहतर टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रेरित करना है.

इंडस्ट्री ने यह भी मांग की थी कि पूरे 5 साल के अंत में क्रेडिट लागू किए जाएं, जिस पर सरकार सहमत हो गई है. इससे कंपनियों को थोड़ी राहत मिलेगी.

कीमत पर क्या असर पड़ेगा?

  • नई टेक्नोलॉजी और रिसर्च की वजह से शुरुआती दौर में कारों की कीमत बढ़ सकती है.
  • लेकिन लंबे समय में बेहतर माइलेज और कम फ्यूल खर्च से ग्राहकों को फायदा मिलेगा.

कंक्लूजन

CAFE-3 norms के साथ भारत का ऑटो सेक्टर एक बड़े बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. अब कम प्रदूषण, बेहतर माइलेज और वैकल्पिक फ्यूल के लिए फोकस साफ है. आने वाले सालों में EV, Hybrid और Flex-fuel गाड़ियां तेजी से बढ़ सकती हैं.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 CAFE-3 norms कब लागू होंगे?

अप्रैल 2027 से मार्च 2032 तक लागू होंगे.

Q2 इसका आम ग्राहकों पर क्या असर होगा?

शुरुआत में गाड़ियां महंगी हो सकती हैं, लेकिन माइलेज बेहतर मिलेगा.

Q3 E25 fuel क्या होता है?

इसमें पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिलाया जाता है.

Q4 क्या पेट्रोल-डीजल गाड़ियां बंद हो जाएंगी?

नहीं, लेकिन उन पर सख्ती बढ़ेगी और उन्हें ज्यादा efficient बनाना होगा.

Q5 EV और Hybrid को क्या फायदा मिलेगा?

सरकार इन्हें super credits देकर बढ़ावा देगी, जिससे कंपनियां इन्हें ज्यादा बनाएंगी.

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