मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: दिल्ली-एनसीआर से हटेंगे 2 लाख से ज्यादा पुराने वाहन, रिप्लेस करने पर मिलेगी भारी सब्सिडी

दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक बहुत बड़े प्लान को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों में चलने वाले पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को बदला जाएगा. सरकार ने इसके लिए 9,585 करोड़ रुपये का बजट रखा है.
मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: दिल्ली-एनसीआर से हटेंगे 2 लाख से ज्यादा पुराने वाहन, रिप्लेस करने पर मिलेगी भारी सब्सिडी

मोदी सरकार ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा को साफ बनाने और गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने के लिए दो साल की एक खास योजना तैयार की है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

दिल्ली-एनसीआर के लोगों को आने वाले दिनों में प्रदूषण से बड़ी राहत मिल सकती है. पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक फैसले को मंजूरी दी है. सरकार ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा को साफ बनाने और गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने के लिए दो साल की एक खास योजना तैयार की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़कों से उन पुराने ट्रकों और बसों को हटाना है जो सबसे ज्यादा धुआं और प्रदूषण फैलाते हैं.

इस योजना को नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) के जरिए पैसा दिया जाएगा. इसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) मिलकर जमीन पर लागू करेंगे. इस बड़े मिशन में दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर में आने वाले राज्य जैसे हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश भी मिलकर काम करेंगे.

यह भारी-भरकम राशि इसलिए लगाई जा रही है, ताकि गाड़ी मालिकों को अपने पुराने वाहन बदलने में आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े. केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद नए वाहन के रजिस्ट्रेशन की तारीख से अगले 5 सालों तक जारी रहेगी.

आखिर पुराने वाहनों को बदलना क्यों है बेहद जरूरी?

दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों के महीनों में हवा इतनी खराब हो जाती है कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और टेरी (TERI) ने अगस्त 2018 में एनसीआर के प्रदूषण पर एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि परिवहन क्षेत्र (ट्रांसपोर्ट सेक्टर) प्रदूषण के लिए कितना जिम्मेदार है:

  • यह सेक्टर हवा में मौजूद बारीक कणों (PM 2.5) में 14% की हिस्सेदारी रखता है.
  • जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस का 40% हिस्सा यहीं से आता है.
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) के कुल उत्सर्जन में इस सेक्टर का हिस्सा 63% है.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पूरे ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ट्रक और बस की संख्या महज 3% है, लेकिन ये अकेले 36% PM 2.5 प्रदूषण फैलाते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक पुराना (Pre-BS) भारी वाहन अकेले उतना प्रदूषण फैलाता है जितने 14 नए बीएस-6 वाहन मिलकर फैलाते हैं. वहीं एक बीएस-4 वाहन भी नए बीएस-6 वाहन के मुकाबले 2.7 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाता है. इसलिए इन गाड़ियों को बदलना बेहद जरूरी हो गया है.

किन गाड़ी मालिकों को मिलेगा इसका फायदा?

इस योजना से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 2.07 लाख गाड़ी मालिकों को सीधा फायदा पहुंचने वाला है. इनमें से 1.91 लाख ट्रक मालिक हैं और 16,329 बसों के मालिक शामिल हैं. यह योजना दिल्ली, हरियाणा (एनसीआर जिले), राजस्थान (अलवर, भरतपुर जैसे एनसीआर क्षेत्र) और उत्तर प्रदेश (नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ आदि) में लागू होगी.

पुराने वाहनों को हटाने और नए वाहन खरीदने के नियम

सरकार ने पुराने वाहनों की स्थिति को देखते हुए कुछ कड़े और साफ नियम बनाए हैं:

बीएस-3 या उससे पुराने वाहन: इन गाड़ियों को सिर्फ और सिर्फ सरकार से मान्यता प्राप्त 'पंजीकृत वाहन कबाड़ केंद्र' (Registered Vehicle Scrapping Facility) पर ले जाकर कबाड़ (Scrap) करना जरूरी होगा.

बीएस-4 वाहन: इन वाहनों के मालिकों के पास 2 विकल्प होंगे. या तो वे इन्हें कबाड़ में दे दें, या फिर इन्हें एनसीआर से बाहर ऐसे छोटे शहरों या कस्बों में बेच दें जो 'नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' (NCAP) के दायरे में नहीं आते हैं.

दिल्ली के लिए खास नियम: दिल्ली के अंदर इस योजना का फायदा उठाकर खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन (Light Goods Vehicles) सिर्फ इलेक्ट्रिक होने चाहिए. इसके अलावा दिल्ली में चलने वाली बसें या तो पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी या फिर बीएस-6 सीएनजी (CNG) मॉडल की होंगी.

सरकारी गाड़ियां बाहर: यह योजना सिर्फ आम जनता और प्राइवेट ट्रांसपोर्टर्स के लिए है. सरकार के अधीन आने वाले वाहनों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

गाड़ी मालिकों को मिलने वाले बड़े फायदे और ऑफर्स

पुराने वाहनों को छोड़ने और नए पर्यावरण-अनुकूल वाहन खरीदने पर सरकार और कंपनियों की तरफ से बंपर फायदे दिए जा रहे हैं:

ब्याज में छूट: नए वाहन के लिए लोन लेने पर केंद्र सरकार 5 साल तक ब्याज में 5% की सब्सिडी (Subvention) देगी.

ईंधन के मुफ्त वाउचर: गाड़ी की कैटेगरी के हिसाब से मालिकों को हर महीने 4,800 रुपये तक के ईंधन (फ्यूल) वाउचर मिलेंगे.

इलेक्ट्रिक वाहनों पर नकद लाभ: अगर कोई मालिक इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) चुनता है, तो उसे एकमुश्त बड़ा नकद लाभ और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट की ट्रेडिंग का मौका मिलेगा.

टैक्स और फीस से आजादी: राज्य सरकारें नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन फीस बिल्कुल माफ कर देंगी. इसके अलावा नए वाहनों पर 10 साल तक रोड टैक्स (मोटर व्हीकल टैक्स) में 100% तक की छूट मिलेगी, जबकि सेकंड हैंड वाहनों पर 50% की छूट मिलेगी.

पुरानी देनदारियों से मुक्ति: अगर किसी पुराने वाहन पर पुराना टैक्स या कोई लायबिलिटी बकाया है, तो योजना में शामिल होने पर राज्य सरकारें उसे पूरी तरह माफ कर देंगी.

कंपनियों की तरफ से डिस्काउंट: गाड़ियां बनाने वाली ऑटो कंपनियां (OEMs) नए वाहन के शोरूम प्राइस (Ex-Showroom Price) पर सीधे 8% की छूट देंगी.

पूरी तरह डिजिटल होगी व्यवस्था और निगरानी का ढांचा

इस योजना में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए इसे पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है. एक नया एकीकृत पोर्टल (Integrated Portal) शुरू किया जा रहा है. इस पोर्टल के जरिए गाड़ी की पात्रता की जांच तुरंत हो जाएगी, लोन के ब्याज की सब्सिडी सीधे खाते में पहुंचेगी और ईंधन के वाउचर भी डिजिटल माध्यम से क्रेडिट होंगे. इस पोर्टल से प्रदूषण में आ रही कमी पर भी नजर रखी जाएगी.

योजना को सही तरीके से चलाने के लिए देश के कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल एम्पावर्ड कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी में नीति आयोग के सीईओ, कई मंत्रालयों के सचिव और एनसीआर राज्यों के मुख्य सचिव शामिल होंगे. जिला स्तर पर इस योजना को लागू करने और इसकी निगरानी करने की पूरी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर (DC) या जिला मजिस्ट्रेट (DM) की होगी.

Conclusion

केंद्र सरकार की यह योजना दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण के जहर से बचाने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम है. भारी वित्तीय मदद, टैक्स में छूट और कंपनियों के डिस्काउंट के कारण ट्रक और बस मालिकों के लिए अपने पुराने वाहनों को बदलना अब बहुत आसान हो जाएगा. जब एनसीआर की सड़कों पर धुआं उड़ाते पुराने ट्रकों की जगह आधुनिक बीएस-6 और इलेक्ट्रिक गाड़ियां दौड़ेंगी, तो निश्चित रूप से यहां की हवा साफ होगी और आम लोगों को सांस लेने के लिए एक बेहतर माहौल मिल सकेगा.

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