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इससे वाहनों और मॉडिफाइड वाहनों की मंजूरी प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Chatgpt)
देश में वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल कंपनियों और वाहन मॉडिफिकेशन उद्योग के लिए बड़ी खबर है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने वाहनों से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं. हाल ही में मंत्रालय ने 'सेंट्रल मोटर व्हीकल (नौवां संशोधन) नियम, 2026' का नोटिफिकेशन जारी किया है. नए नियमों के तहत मॉडिफाइड गाड़ियों की टेस्टिंग, टाइप अप्रूवल और आयात से जुड़ी शर्तों को काफी आसान बनाया गया है.
आइए समझते हैं कि सरकार ने किन नियमों में बदलाव किया है और इसका आम जनता और ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा.
नए नियमों के तहत अब मॉडिफाइड, रेट्रोफिटेड और Adapted Vehicles की टेस्टिंग और टाइप अप्रूवल केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा. नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब यह काम-
इससे विशेष जरूरतों वाले वाहनों और मॉडिफाइड वाहनों की मंजूरी प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है.
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सरकार ने विदेशों से मंगाई जाने वाली राइट-हैंड ड्राइव (RHD) गाड़ियों के नियमों में बड़ी छूट दी है. अगर ये गाड़ियां अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती हैं, तो अब भारत में इनके रजिस्ट्रेशन की मंजूरी मिलेगी. नए नियमों के अनुसार-
अगर वाहन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी मानकों को पूरा करते हैं, तो उन्हें भारत में रजिस्ट्रेशन की मंजूरी मिल सकेगी. साथ ही, पर्सनल यूजन, प्रदर्शन, रिसर्च या वैज्ञानिक कामों के लिए मंगवाए गए कुछ अनयूज्ड राइट-हैंड ड्राइव वाहनों को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा मिलेगी.
पर्यावरण और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए एक अहम शर्त जोड़ी गई है. अब विदेशों से आयात की जाने वाली पेट्रोल गाड़ियों के लिए E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) पर एमिशन परीक्षण रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा. यह रिपोर्ट यूरोपीय या जापानी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए. इस कदम का उद्देश्य देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है.

भारी और कृषि वाहनों के डिजाइन और अप्रूवल प्रोसेस को भी व्यावहारिक बनाया गया है. कृषि ट्रैक्टरों के टाइप अप्रूवल और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अब AIS-017 (Part 2) Rev.2: 2016 मानक के अनुसार की जाएगी. साथ ही, ट्रैक्टरों में सामने की तरफ बिल्कुल बीच में स्टीयरिंग देने की मंजूरी दे दी गई है.
निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और वाहनों (CEV) में अब दोनों तरफ स्टीयरिंग देने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है, जिससे ऑपरेटर को काम करने में आसानी होगी.
ट्रक बॉडी के प्रोटोटाइप की टेस्टिंग और टाइप अप्रूवल के लिए अब सिर्फ चुनिंदा एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना होगा. अब यह काम राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों या राज्य परिवहन उपक्रमों के जरिए भी कराया जा सकेगा.
नए नियमों से-
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम वाहन उद्योग को आधुनिक बनाने और भारतीय नियमों को वैश्विक मानकों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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