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अमेरिका को ग्रेट अमेरिका बनाने के पीछे तुले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने टैरिफ को लेकर नया फैसला लिया है. इसका असर सीधा ऑटो कंपनियों पर पड़ेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फैसला लिया है कि अमेरिका के बाहर से आने वाली गाड़ियों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. यानी कि अमेरिका इम्पोर्ट होने वाली कार अब और महंगी हो जाएंगी और ऑटो कंपनियों को ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा. इसमें जापान, जर्मनी, साउथ कोरिया जैसे देश शामिल हैं, जिन पर इसका सीधा असर पड़ेगा. डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में ही वाहन कंपनियों को फायदा पहुंचाने और राजस्व बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी कर रहे हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह आयातित वाहनों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगा रहे हैं. व्हाइट हाउस का दावा है कि इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर वाहन विनिर्माताओं पर वित्तीय दबाव भी पड़ सकता है. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘‘इससे वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा. हम प्रभावी रूप से 25 प्रतिशत शुल्क लगाएंगे.’’ शुल्क से व्हाइट हाउस को सालाना 100 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व मिलने की उम्मीद है.
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हालांकि यह आसान नहीं होगा क्योंकि अमेरिकी वाहन विनिर्माता भी अपने कई कलपुर्जे व घटक दुनिया भर से खरीदते हैं. अप्रैल से शुरू होने वाली कर वृद्धि का मतलब है कि वाहन विनिर्माताओं को उच्च लागत और कम बिक्री का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, ट्रंप का तर्क है कि शुल्क के कारण अमेरिका में और अधिक कारखाने खुलेंगे तथा वह ‘‘बेकार’’ आपूर्ति श्रृंखला समाप्त हो जाएगी, जिसके माध्यम से अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में वाहन कलपुर्जों और तैयार वाहनों का विनिर्माण किया जाता है.
ट्रंप ने अपने द्वारा हस्ताक्षरित शुल्क निर्देश के प्रति अपनी गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘यह स्थायी (फैसला) है।’’ राष्ट्रपति ने कहा कि वाहनों पर शुल्क तीन अप्रैल से वसूला जाना शुरू किया जाएगा. इस बीच, बुधवार को कारोबार में जनरल मोटर्स के शेयर में करीब तीन प्रतिशत की गिरावट आई. फोर्ड के शेयर में मामूली बढ़त दर्ज की गई.
जीप तथा क्रिसलर का स्वामित्व रखने वाली स्टेलेंटिस के शेयर में भी करीब 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई. वैश्विक नेताओं ने शुल्क की आलोचना करने में देर नहीं लगाई जो इस बात का संकेत है कि ट्रंप व्यापक व्यापार युद्ध को तेज कर सकते हैं जिससे दुनिया भर में वृद्धि को नुकसान पहुंच सकता है.